श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.19.133 
ঽজ্ঞান—বডঽ অদ্বৈতের শুনিযা বচন
ক্রোধে বাহ্য পাসরিল শচীর নন্দন
ऽज्ञान—बडऽ अद्वैतेर शुनिया वचन
क्रोधे बाह्य पासरिल शचीर नन्दन
 
 
अनुवाद
अद्वैत को यह कहते हुए सुनकर कि ज्ञान श्रेष्ठ है, शचीपुत्र क्रोध से अपनी बाह्य चेतना खो बैठे।
 
Hearing Advaita say that knowledge is superior, Sachiputra lost his external consciousness in anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)