श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  2.19.132 
অদ্বৈত বলযে,—“সর্ব-কাল বড ঽজ্ঞানঽ
যার নাহি জ্ঞান, তাঽর ভক্তিতে কি কাম?”
अद्वैत बलये,—“सर्व-काल बड ऽज्ञानऽ
यार नाहि ज्ञान, ताऽर भक्तिते कि काम?”
 
 
अनुवाद
अद्वैत ने उत्तर दिया, "ज्ञान सदैव श्रेष्ठ है। जिसे ज्ञान नहीं है, उसके लिए भक्ति का क्या उपयोग है?"
 
Advaita replied, "Knowledge is always superior. What is the use of devotion for one who does not have knowledge?"
तात्पर्य
महाप्रभु द्वारा ज्ञान और भक्ति के बीच अंतर का पता लगाने का अनुरोध किए जाने पर, अद्वैत ने उन्हें सूचित किया कि ज्ञान भक्ति से श्रेष्ठ है। उन्होंने उन्हें यह भी बताया कि ज्ञान के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को भक्तिमार्ग पर बने रहने की कोई आवश्यकता नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)