श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  2.18.93 
সেই অবসরে প্রভু হরিবে আমারে
না মারিবা বন্ধু, দোষ ক্ষমিবা আমারে
सेइ अवसरे प्रभु हरिबे आमारे
ना मारिबा बन्धु, दोष क्षमिबा आमारे
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु, इस अवसर का लाभ उठाकर मेरा अपहरण कर लो। किसी भी शुभचिंतक का वध मत करो, और मेरे अपराधों को क्षमा करो।"
 
"O Lord, take advantage of this opportunity to abduct me. Do not kill any well-wishers, and forgive my crimes."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)