श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.18.71 
আপনা না জানে প্রভু রুক্মিণী-আবেশে
বিদর্ভের সুতা যেন আপনারে বাসে
आपना ना जाने प्रभु रुक्मिणी-आवेशे
विदर्भेर सुता येन आपनारे वासे
 
 
अनुवाद
रुक्मिणी के भाव में मग्न होकर भगवान् अपने को भूल गये और अपने को विदर्भराज की पुत्री समझने लगे।
 
Immersed in the feelings of Rukmini, the Lord forgot himself and started considering himself the daughter of Vidarbha King.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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