श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.18.63 
যত পতি-ব্রতা-গণ—সকল লৈযা
আই দেখে কৃষ্ণ-সুধা-রসে মগ্ন হৈযা
यत पति-व्रता-गण—सकल लैया
आइ देखे कृष्ण-सुधा-रसे मग्न हैया
 
 
अनुवाद
माता शची तथा अन्य सतीत्वमयी स्त्रियाँ कृष्णभावनामृत की अमृतमयी मधुरिमा में लीन हो गईं।
 
Mother Sachi and other chaste women became absorbed in the nectar-like sweetness of Krishna consciousness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)