|
| |
| |
श्लोक 2.18.59  |
না পারি রহিতে শূন্য-বৈকুন্ঠ দেখিযা
আইলাম আপন ঠাকুর সঙরিযা |
ना पारि रहिते शून्य-वैकुन्ठ देखिया
आइलाम आपन ठाकुर सङरिया |
| |
| |
| अनुवाद |
| “मैं निर्जन वैकुंठ में नहीं रह सकता था, इसलिए भगवान का स्मरण करते हुए मैं यहां आया हूं। |
| |
| “I could not stay in the deserted Vaikuntha, so remembering the Lord, I have come here. |
| ✨ ai-generated |
| |
|