श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.18.55 
“কে তুমি আইলা এথা, কোন্ বা কারণে?”
শ্রীবাস বলেন,—“শুন কহি যে বচনে
“के तुमि आइला एथा, कोन् वा कारणे?”
श्रीवास बलेन,—“शुन कहि ये वचने
 
 
अनुवाद
"तुम कौन हो? यहाँ क्यों आए हो?" श्रीवास ने उत्तर दिया, "कृपया मेरी बात सुनो।
 
"Who are you? Why have you come here?" Srivasa replied, "Please listen to me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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