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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 34
श्लोक
2.18.34
প্রভু বলে,—“যত কাচ, সকলি তোমার
ইচ্ছা-অনুরূপ কাচ কাচঽ আপনার”
प्रभु बले,—“यत काच, सकलि तोमार
इच्छा-अनुरूप काच काचऽ आपनार”
अनुवाद
भगवान ने उत्तर दिया, "सारी पोशाकें आपकी हैं। जो चाहें पहन लीजिए।"
God replied, "All the clothes are yours. Wear whatever you want."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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