श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.18.31 
শ্রী-চন্দ্রশেখর-ভাগ্য তার
এই সীমাযার ঘরে প্রভু প্রকাশিলা এ মহিমা
श्री-चन्द्रशेखर-भाग्य तार
एइ सीमायार घरे प्रभु प्रकाशिला ए महिमा
 
 
अनुवाद
यह श्री चन्द्रशेखर के सौभाग्य की सीमा थी, क्योंकि भगवान ने यह लीला उनके घर पर ही प्रकट की थी।
 
This was the extent of Sri Chandrashekhar's good fortune, because the Lord performed this leela at his home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)