श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.18.25 
সর্ব-রঙ্গ-চূডামণি চৈতন্য-গোসাঙি
পুনঃআজ্ঞা করিলেন,—“কারো চিন্তা নাই
सर्व-रङ्ग-चूडामणि चैतन्य-गोसाङि
पुनःआज्ञा करिलेन,—“कारो चिन्ता नाइ
 
 
अनुवाद
सभी भोगियों के शिरोमणि भगवान चैतन्य ने पुनः कहा, "चिंता मत करो।
 
Lord Caitanya, the crown jewel of all enjoyers, again said, “Don’t worry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)