श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 232
 
 
श्लोक  2.18.232 
এ-মত অচিন্ত্য-লীলা গৌরচন্দ্র করে
নবদ্বীপে সব ভক্ত সহিতে বিহরে
ए-मत अचिन्त्य-लीला गौरचन्द्र करे
नवद्वीपे सब भक्त सहिते विहरे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार गौरचन्द्र ने नवद्वीप में भक्तों के साथ अकल्पनीय लीलाओं का आनंद लिया।
 
Thus Gaurachandra enjoyed unimaginable pastimes with the devotees in Navadvipa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)