श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 224
 
 
श्लोक  2.18.224 
মধ্য-খণ্ড-কথা যেন অমৃত-শ্রবণ
যহিঙ্ লক্ষ্মী-বেশে নৃত্য কৈলা নারাযণ
मध्य-खण्ड-कथा येन अमृत-श्रवण
यहिङ् लक्ष्मी-वेशे नृत्य कैला नारायण
 
 
अनुवाद
मध्यखण्ड के विषय, जिनमें भगवान नारायण के लक्ष्मी रूपी नृत्य का वर्णन है, अमृतवर्षा के समान हैं।
 
The themes of the middle section, which describe the dance of Lord Narayana in the form of Lakshmi, are like a shower of nectar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)