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श्लोक 2.18.212  |
ইচ্ছায করযে সৃষ্টি, ইচ্ছায মিলায
অনন্ত ব্রহ্মাণ্ড সৃষ্টি করযে লীলায |
इच्छाय करये सृष्टि, इच्छाय मिलाय
अनन्त ब्रह्माण्ड सृष्टि करये लीलाय |
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| अनुवाद |
| अपनी मधुर इच्छा से ही वे सृष्टि और संहार करते हैं। वे अपनी लीलाओं में से एक लीला के रूप में असंख्य ब्रह्माण्डों की रचना करते हैं। |
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| By His sweet will, He creates and destroys. As one of His pastimes, He creates countless universes. |
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