श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 209
 
 
श्लोक  2.18.209 
এ সব লীলার কভু অবধি না হয
ঽআবির্ভাব, তিরোভাবঽ বেদে মাত্র কয
ए सब लीलार कभु अवधि ना हय
ऽआविर्भाव, तिरोभावऽ वेदे मात्र कय
 
 
अनुवाद
यद्यपि वेदों में भगवान के “आगमन” और “अन्त” का वर्णन है, किन्तु वास्तव में उनकी लीलाओं का कोई अन्त नहीं है।
 
Although the Vedas describe the “arrival” and “end” of the Lord, in reality there is no end to His pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)