श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  2.18.187 
গৃহ-মাঝে কান্দে সব পতি-ব্রতা-গণ
আনন্দ হৈল চন্দ্রশেখর-ভবন
गृह-माझे कान्दे सब पति-व्रता-गण
आनन्द हैल चन्द्रशेखर-भवन
 
 
अनुवाद
पवित्र स्त्रियाँ कमरे के अन्दर रो पड़ीं और चन्द्रशेखर का घर परमानंद से भर गया।
 
The holy women wept inside the room and Chandrashekhar's house was filled with ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)