श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 168
 
 
श्लोक  2.18.168 
জয জয অনন্ত-ব্রহ্মাণ্ড-কোটীশ্বরি!
তুমি যুগে যুগে ধর্ম রাখ অবতরিঽ
जय जय अनन्त-ब्रह्माण्ड-कोटीश्वरि!
तुमि युगे युगे धर्म राख अवतरिऽ
 
 
अनुवाद
"असंख्य ब्रह्माण्डों की देवी की जय हो! आप धर्म की रक्षा के लिए प्रत्येक युग में अवतार लेती हैं।
 
"Hail the Goddess of countless universes! You incarnate in every age to protect the Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)