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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 165
श्लोक
2.18.165
জননী-আবেশ বুঝিলেন সর্ব-গণে
সেই-রূপে পডে স্তুতি, মহাপ্রভু শুনে
जननी-आवेश बुझिलेन सर्व-गणे
सेइ-रूपे पडे स्तुति, महाप्रभु शुने
अनुवाद
सभी लोग समझ गए कि भगवान माता के भाव में लीन हैं, इसलिए उन्होंने उचित प्रार्थना की, जिसे भगवान ने सुन लिया।
Everyone understood that God was absorbed in the feelings of the Mother, so they offered appropriate prayers, which were heard by the Lord.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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