श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  2.18.163 
ক্ষণেকে ঠাকুর গোপীনাথে কোলে করিঽ
মহালক্ষ্মী-ভাবে উঠে খট্টার উপরি
क्षणेके ठाकुर गोपीनाथे कोले करिऽ
महालक्ष्मी-भावे उठे खट्टार उपरि
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने गोपीनाथ के विग्रह को अपनी गोद में लिया और महालक्ष्मी के भाव से सिंहासन पर विराजमान हो गये।
 
Then the Lord took the idol of Gopinath in his lap and sat on the throne in the form of Mahalakshmi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)