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श्लोक 2.18.161  |
কি অদ্ভুত হৈল কৃষ্ণ-প্রেমের ক্রন্দন
সকল করায প্রভু শ্রী-শচীনন্দন |
कि अद्भुत हैल कृष्ण-प्रेमेर क्रन्दन
सकल कराय प्रभु श्री-शचीनन्दन |
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| अनुवाद |
| कृष्ण के प्रेम में उनका रोना कितना अद्भुत था! सब कुछ श्रीशचीनन्दन की इच्छा से ही हुआ। |
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| How wonderful was her weeping in love for Krishna! Everything happened by the will of Sri Sachinandan. |
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