vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
»
श्लोक 141
श्लोक
2.18.141
নযনে আনন্দ-ধারা দেখিযে যখন
মূর্তিমতী গঙ্গা যেন বুঝিযে তখন
नयने आनन्द-धारा देखिये यखन
मूर्तिमती गङ्गा येन बुझिये तखन
अनुवाद
जब भक्तों ने उनकी आंखों से आनंद के आंसू बहते देखे तो उन्होंने उन्हें साक्षात गंगा समझा।
When the devotees saw tears of joy flowing from his eyes, they considered him to be the real Ganga.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×