श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.18.141 
নযনে আনন্দ-ধারা দেখিযে যখন
মূর্তিমতী গঙ্গা যেন বুঝিযে তখন
नयने आनन्द-धारा देखिये यखन
मूर्तिमती गङ्गा येन बुझिये तखन
 
 
अनुवाद
जब भक्तों ने उनकी आंखों से आनंद के आंसू बहते देखे तो उन्होंने उन्हें साक्षात गंगा समझा।
 
When the devotees saw tears of joy flowing from his eyes, they considered him to be the real Ganga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)