vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
»
श्लोक 139
श्लोक
2.18.139
হেন দঢাইতে কেহ নারে কোন জন
কোন্ প্রকৃতির ভাবে নাচে নারাযণ?
हेन दढाइते केह नारे कोन जन
कोन् प्रकृतिर भावे नाचे नारायण?
अनुवाद
कोई भी निश्चित नहीं था कि भगवान नारायण किस भाव में नृत्य कर रहे थे।
No one was sure in what mood Lord Narayana was dancing.
तात्पर्य
शब्द दधीति का अर्थ होता है "विश्वास के साथ जानना।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×