श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  2.18.139 
হেন দঢাইতে কেহ নারে কোন জন
কোন্ প্রকৃতির ভাবে নাচে নারাযণ?
हेन दढाइते केह नारे कोन जन
कोन् प्रकृतिर भावे नाचे नारायण?
 
 
अनुवाद
कोई भी निश्चित नहीं था कि भगवान नारायण किस भाव में नृत्य कर रहे थे।
 
No one was sure in what mood Lord Narayana was dancing.
तात्पर्य
शब्द दधीति का अर्थ होता है "विश्वास के साथ जानना।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)