vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
»
श्लोक 132
श्लोक
2.18.132
অচিন্ত্য অব্যক্ত কিবা মহাযোগেশ্বরী
ভক্তির স্বরূপা হৈলা আপনি শ্রী-হরি
अचिन्त्य अव्यक्त किबा महायोगेश्वरी
भक्तिर स्वरूपा हैला आपनि श्री-हरि
अनुवाद
क्या भगवान हरि स्वयं समस्त रहस्यपूर्ण सिद्धियों की अकल्पनीय दिव्य देवी तथा भक्ति सेवा के साक्षात स्वरूप बन गए हैं?
Has Lord Hari himself become the unimaginable divine goddess of all mystical accomplishments and the very embodiment of devotional service?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×