श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.18.130 
আজন্ম ধরিযা প্রভু দেখযে যাহারা
তথাপি লখিতে নারে তিলার্দ্ধেক তাঽরা
आजन्म धरिया प्रभु देखये याहारा
तथापि लखिते नारे तिलार्द्धेक ताऽरा
 
 
अनुवाद
यहां तक ​​कि जो लोग भगवान को जन्म से ही देखते थे, वे भी उन्हें पहचान नहीं पाए।
 
Even those who had seen the Lord since birth could not recognize him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)