श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.18.127 
কিবা মহালক্ষ্মী, কিবা আইলা পার্বতী?
কিবা বৃন্দাবনের সম্পত্তি মূর্তিমতী?
किबा महालक्ष्मी, किबा आइला पार्वती?
किबा वृन्दावनेर सम्पत्ति मूर्तिमती?
 
 
अनुवाद
क्या महालक्ष्मी या पार्वती प्रकट हुई हैं? क्या वृन्दावन का खजाना स्वयं आया है?
 
Has Mahalakshmi or Parvati appeared? Has the treasure of Vrindavan come on its own?
तात्पर्य
"वृन्दा-वनर संपत्ति" पद से तात्पर्य है वृषभानु की पुत्री वार्षभानवी ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)