श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.18.122 
মণ্ডলী হৈযা সব বৈষ্ণব রহিলা
জয জয মহাধ্বনি করিতে লাগিলা
मण्डली हैया सब वैष्णव रहिला
जय जय महाध्वनि करिते लागिला
 
 
अनुवाद
सभी वैष्णवों ने एक साथ जोर से जयकारा लगाया, “जय! जय!”
 
All the Vaishnavas shouted loudly together, "Jai! Jai!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)