श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.17.81 
আর বার বলে প্রভু,—“উঠহ আচার্য
চিন্তা নাহি, উঠি কর আপনার কার্য”
आर बार बले प्रभु,—“उठह आचार्य
चिन्ता नाहि, उठि कर आपनार कार्य”
 
 
अनुवाद
भगवान ने फिर कहा, "उठो आचार्य! चिंता मत करो। उठो और अपना कर्तव्य करो।"
 
The Lord then said, "Get up, Acharya! Don't worry. Get up and do your duty."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)