श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.17.78 
প্রসাদে হৈযা মত্ত বুলে অহঙ্কারে
পাইযা প্রভুর দণ্ড কম্প দেহ-ভারে
प्रसादे हैया मत्त बुले अहङ्कारे
पाइया प्रभुर दण्ड कम्प देह-भारे
 
 
अनुवाद
पहले भगवान की कृपा पाकर अद्वैत अहंकार में मदमस्त होकर घूमता था, किन्तु भगवान द्वारा दण्डित होने पर उसका शरीर काँपने लगा।
 
Earlier, after receiving the blessings of God, Advaita used to roam around intoxicated with ego, but when he was punished by God, his body started trembling.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)