श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.17.7 
নগর ভ্রমণ করে প্রভু নিজ রঙ্গে
গূঢ-রূপে থাকযে সেবক-সব-সঙ্গে
नगर भ्रमण करे प्रभु निज रङ्गे
गूढ-रूपे थाकये सेवक-सब-सङ्गे
 
 
अनुवाद
अपने परमानंद में भगवान ने अपनी पहचान छिपाए रखी और अपने भक्तों की संगति में पूरे शहर में विचरण करते रहे।
 
In his ecstasy, the Lord kept his identity hidden and roamed throughout the city in the company of his devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)