श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.17.65 
ক্ষণ-প্রায গেল নিশা কৃষ্ণ-কথা-রসে
প্রভু দেখে—দিবস হৈল পরকাশে
क्षण-प्राय गेल निशा कृष्ण-कथा-रसे
प्रभु देखे—दिवस हैल परकाशे
 
 
अनुवाद
कृष्ण की कथा का आनंद लेते हुए पूरी रात एक क्षण के समान बीत गई। तभी भगवान ने देखा कि भोर हो गई है।
 
The entire night passed like a moment as they enjoyed Krishna's stories. Then the Lord realized it was dawn.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)