श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.17.64 
ভাগ্যবন্ত নন্দন অশেষ-কথা-রঙ্গে
সর্ব-রাত্রি গোঙাইলাঠাকুরের সঙ্গে
भाग्यवन्त नन्दन अशेष-कथा-रङ्गे
सर्व-रात्रि गोङाइलाठाकुरेर सङ्गे
 
 
अनुवाद
भाग्यशाली नन्दन आचार्य ने पूरी रात भगवान के साथ कृष्ण के असीमित विषयों पर चर्चा करते हुए बिताई।
 
The fortunate Nandana Acharya spent the entire night discussing with the Lord the infinite subjects of Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)