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श्लोक 2.17.62  |
যে নারিলা লুকাইতে ক্ষীর-সিন্ধু-মাঝে
সে কেমনে লুকাইব বাহির-সমাজে?” |
ये नारिला लुकाइते क्षीर-सिन्धु-माझे
से केमने लुकाइब बाहिर-समाजे?” |
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| अनुवाद |
| “जो व्यक्ति क्षीरसागर में नहीं छिप सका, वह खुले समाज में कैसे छिप सकता है?” |
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| “How can a person who could not hide in the ocean of milk hide in an open society?” |
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