ব্যাকরণ-শাস্ত্রে সবে বিদ্যার আদান
ভট্টাচার্য প্রতি ও নাহিক তৃণ-জ্ঞান
व्याकरण-शास्त्रे सबे विद्यार आदान
भट्टाचार्य प्रति ओ नाहिक तृण-ज्ञान
अनुवाद
भगवान ने भट्टाचार्यों को, जो व्याकरण में विद्वान माने जाते थे, घास के तिनके से भी अधिक श्रेष्ठ नहीं समझा।
The Lord did not consider the Bhattacharyas, who were considered scholars in grammar, to be better than even a blade of grass.
तात्पर्य
व्यकरण, जो वैदिक शास्त्रों की एक शाखा है वह साक्षात् वेदों का ही मुख माना गया है। यह सर्व विद्या की पूर्णता का साधन है। ज्ञान के प्रचारक बनकर जो लोग अपने आपको स्थापित कर रहे थे, उन सबकी महाप्रभु ने कुछ भी प्रतिष्ठा नहीं की, अपितु अपनी प्रतिभा से उनको तुच्छ समझकर अपेक्षा की।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥