श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.17.56 
প্রসাদ চন্দন-মালা, দিব্য অর্ঘ্য গন্ধ
চন্দনে ভূষিত কৈল প্রভুর শ্রী-অঙ্গ
प्रसाद चन्दन-माला, दिव्य अर्घ्य गन्ध
चन्दने भूषित कैल प्रभुर श्री-अङ्ग
 
 
अनुवाद
नंदन आचार्य ने अर्घ्य, सुगंधित तेल, चंदन का लेप और पुष्पमाला का प्रसाद अर्पित किया। उन्होंने भगवान के शरीर को चंदन के लेप से सजाया।
 
Nandana Acharya offered arghya (offerings of arghya), fragrant oil, sandalwood paste, and garlands. He decorated the Lord's body with sandalwood paste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)