vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन
»
श्लोक 51
श्लोक
2.17.51
অপরাধ হৈযা প্রভু প্রভুর বিরহে
উপবাস করিঽ গিযা থাকিলেন গৃহে
अपराध हैया प्रभु प्रभुर विरहे
उपवास करिऽ गिया थाकिलेन गृहे
अनुवाद
यह महसूस करते हुए कि उन्होंने कोई अपराध किया है, अद्वैत प्रभु घर चले गए और भगवान से तीव्र वियोग के कारण उपवास करने लगे।
Realizing that he had committed a crime, Advaita Prabhu went home and began fasting due to the intense separation from the Lord.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×