श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.17.51 
অপরাধ হৈযা প্রভু প্রভুর বিরহে
উপবাস করিঽ গিযা থাকিলেন গৃহে
अपराध हैया प्रभु प्रभुर विरहे
उपवास करिऽ गिया थाकिलेन गृहे
 
 
अनुवाद
यह महसूस करते हुए कि उन्होंने कोई अपराध किया है, अद्वैत प्रभु घर चले गए और भगवान से तीव्र वियोग के कारण उपवास करने लगे।
 
Realizing that he had committed a crime, Advaita Prabhu went home and began fasting due to the intense separation from the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)