श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.17.48 
ভক্ত সব না পাইযা প্রভুর উদ্দেশ
দুঃখ-ময হৈল সবে শ্রী-কৃষ্ণ-আবেশ
भक्त सब ना पाइया प्रभुर उद्देश
दुःख-मय हैल सबे श्री-कृष्ण-आवेश
 
 
अनुवाद
कृष्ण के प्रेम में लीन सभी भक्तगण तब व्यथित हो गए जब उन्हें भगवान के बारे में कोई समाचार नहीं मिल सका।
 
All the devotees immersed in the love of Krishna became distressed when they could not get any news about the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)