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श्लोक 2.17.38  |
দুই-জনে মহা কম্প—ঽআজি কিবা ফলেঽ!
নিত্যানন্দ দিগ্ চাহিঽ গৌরচন্দ্র বলে |
दुइ-जने महा कम्प—ऽआजि किबा फलेऽ!
नित्यानन्द दिग् चाहिऽ गौरचन्द्र बले |
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| अनुवाद |
| दोनों यह सोचकर काँप उठे, “आज क्या होगा?” नित्यानंद की ओर देखते हुए गौरचन्द्र बोले। |
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| Both of them shuddered at the thought, “What will happen today?” Gaurachandra asked, looking at Nityananda. |
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