श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.17.37 
কি কার্যে রাখিব প্রেম-রহিত জীবন
কিসেরে বা তোমরা ধরিলে দুই-জন?”
कि कार्ये राखिब प्रेम-रहित जीवन
किसेरे वा तोमरा धरिले दुइ-जन?”
 
 
अनुवाद
"मैं किस उद्देश्य से यह जीवन जीऊँ, जो ईश्वर-प्रेम से रहित है? तुम दोनों ने मुझे क्यों रोक रखा है?"
 
"For what purpose should I live this life, which is devoid of the love of God? Why have you two stopped me?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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