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श्लोक 2.17.37  |
কি কার্যে রাখিব প্রেম-রহিত জীবন
কিসেরে বা তোমরা ধরিলে দুই-জন?” |
कि कार्ये राखिब प्रेम-रहित जीवन
किसेरे वा तोमरा धरिले दुइ-जन?” |
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| अनुवाद |
| "मैं किस उद्देश्य से यह जीवन जीऊँ, जो ईश्वर-प्रेम से रहित है? तुम दोनों ने मुझे क्यों रोक रखा है?" |
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| "For what purpose should I live this life, which is devoid of the love of God? Why have you two stopped me?" |
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