श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.17.29 
নানা-রূপে ভক্ত বাডাযেন গৌরচন্দ্র
কে বুঝিতে পারে তান অনুগ্রহ-দণ্ড
नाना-रूपे भक्त बाडायेन गौरचन्द्र
के बुझिते पारे तान अनुग्रह-दण्ड
 
 
अनुवाद
गौरचन्द्र अनेक प्रकार से अपने भक्तों की महिमा बढ़ाते हैं। उनकी दया और दण्ड को कौन समझ सकता है?
 
Gaurachandra glorifies his devotees in many ways. Who can understand his mercy and punishment?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)