श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.17.21 
মহাপাত্র অদ্বৈত ভ্রূকুটি করিঽ নাচে
“কে-মতে হৈব প্রেম, ঽনাডাঽ শুষিযাছে?
महापात्र अद्वैत भ्रूकुटि करिऽ नाचे
“के-मते हैब प्रेम, ऽनाडाऽ शुषियाछे?
 
 
अनुवाद
भगवान की दया के महान प्राप्तकर्ता अद्वैत प्रभु ने भौंहें चढ़ाकर नृत्य किया और कहा, "जब नाद ने आपको सूखा दिया है, तो आप परमानंद प्रेम का अनुभव कैसे करेंगे?
 
Advaita Prabhu, the great recipient of the Lord's mercy, danced with raised eyebrows and said, "When the sound has drained you dry, how will you experience ecstatic love?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)