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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन
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श्लोक 15
श्लोक
2.17.15
তৃণ-জ্ঞান পাষণ্ডীরে ঠাকুর না করে
আইলেন মহাপ্রভু আপন মন্দিরে
तृण-ज्ञान पाषण्डीरे ठाकुर ना करे
आइलेन महाप्रभु आपन मन्दिरे
अनुवाद
नास्तिकों को घास के तिनके से भी कम नहीं समझकर भगवान अपने घर लौट गये।
Considering atheists no less than a blade of grass, God returned to his home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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