श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  2.17.118 
শ্রী-চৈতন্য নিত্যানন্দ-চান্দ পঙ্হু জান
বৃন্দাবন-দাস তছু পদ-যুগে গান
श्री-चैतन्य नित्यानन्द-चान्द पङ्हु जान
वृन्दावन-दास तछु पद-युगे गान
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य और नित्यानंद प्रभु को अपना जीवन और आत्मा मानकर, मैं, वृन्दावनदास, उनके चरणकमलों की महिमा का गान करता हूँ।
 
Considering Sri Chaitanya and Nityananda Prabhu as my life and soul, I, Vrindavandas, sing the glories of their lotus feet.
 
इस प्रकार श्री चैतन्य-भागवत, मध्य-खण्ड, अध्याय सत्रह - "नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिम
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)