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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 17: नवद्वीप में भगवान का भ्रमण और भक्तों की महिमा का वर्णन
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श्लोक 115
श्लोक
2.17.115
জয জয হলধর নিত্যানন্দ রায
চৈতন্য-কীর্তন স্ফুরে যাঙ্হার কৃপায
जय जय हलधर नित्यानन्द राय
चैतन्य-कीर्तन स्फुरे याङ्हार कृपाय
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द-हलधर की जय हो, जिनकी कृपा से भगवान चैतन्य की महिमा प्रकट होती है!
All glory to Lord Nityananda-Haldhar, by whose grace the glories of Lord Chaitanya are revealed!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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