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श्लोक 2.17.100  |
“এখনে সে বলি নাথ, তোর ঠাকুরালী”
নাচেন অদ্বৈত রঙ্গে দিযা করতালি |
“एखने से बलि नाथ, तोर ठाकुराली”
नाचेन अद्वैत रङ्गे दिया करतालि |
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| अनुवाद |
| अद्वैत ने कहा, “अब मैं कह सकता हूँ कि आप मेरे भगवान हैं!” फिर वह परमानंद में नाचने लगे। |
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| Advaita said, “Now I can say that you are my Lord!” Then he began to dance in ecstasy. |
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