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श्लोक 2.16.9  |
পুনঃ পুনঃ নাচিঽ বলে,—“সুখ নাহি পাই
কেহ বা কি লুকাইযা আছে কোন্ ঠাঞি?” |
पुनः पुनः नाचिऽ बले,—“सुख नाहि पाइ
केह वा कि लुकाइया आछे कोन् ठाञि?” |
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| अनुवाद |
| नाचते हुए वे बार-बार कह रहे थे, "मुझे कोई खुशी नहीं मिल रही। क्या यहाँ कोई छिपा है?" |
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| As he danced, he kept saying, "I can't find any happiness. Is there someone hiding here?" |
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