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श्लोक 2.16.70  |
তথাপিহ তুমি চুরি কর ক্ষুদ্র-স্থানে
ক্ষুদ্র সṁহারিতে কৃপা নাহি বাস মনে |
तथापिह तुमि चुरि कर क्षुद्र-स्थाने
क्षुद्र सꣳहारिते कृपा नाहि वास मने |
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| अनुवाद |
| "फिर भी तुम एक तुच्छ स्रोत से चोरी करते हो। जब किसी तुच्छ प्राणी को नष्ट करने की बात आती है, तो तुम्हें ज़रा भी दया नहीं आती। |
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| "Yet you steal from a lowly source. When it comes to destroying a lowly creature, you have no mercy at all. |
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