श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.16.68 
লৈযা চরণ-ধূলি তারে কৈলা ক্ষয
সṁহার করিতে তুমি পরম নির্দয
लैया चरण-धूलि तारे कैला क्षय
सꣳहार करिते तुमि परम निर्दय
 
 
अनुवाद
"तुमने उसके पैरों की धूल उठाकर उसे नष्ट कर दिया। विनाश के कार्य में तुम अत्यंत निर्दयी हो।
 
"You have destroyed him by taking the dust from his feet. You are ruthless in your work of destruction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)