श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.16.55 
কোন্ চোরে আমারে বা করিযাছে চুরি?
সেই অপরাধে আমি নাচিতে না পারি
कोन् चोरे आमारे वा करियाछे चुरि?
सेइ अपराधे आमि नाचिते ना पारि
 
 
अनुवाद
"या किसी चोर ने मुझसे चोरी की है? क्या उसी अपराध के कारण मैं नाच नहीं पा रहा हूँ?"
 
"Or has a thief stolen from me? Is it because of that crime that I am unable to dance?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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