vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना
»
श्लोक 47
श्लोक
2.16.47
কখনো বা মুছিযা পুঙ্ছিযা লয শিরে
কখনো বাষড্-অঙ্গ-বিহিত পূজা করে
कखनो वा मुछिया पुङ्छिया लय शिरे
कखनो वाषड्-अङ्ग-विहित पूजा करे
अनुवाद
कभी वे भगवान के चरणों पर अपना सिर रगड़ते, तो कभी छः द्रव्यों से भगवान की पूजा करते।
Sometimes he would rub his head on the feet of God, and sometimes he would worship God with six substances.
तात्पर्य
षडङ्ग शब्दार्थ हेतु मध्यमखण्ड (6.33) की टीका देखें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×