श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.16.37 
ভযে সব বৈষ্ণব করেন সঙ্কোচন
হেন প্রাণ নাহি কারো, করিবে কথন
भये सब वैष्णव करेन सङ्कोचन
हेन प्राण नाहि कारो, करिबे कथन
 
 
अनुवाद
सभी वैष्णव भय से झिझकने लगे, उनमें बोलने का साहस नहीं था।
 
All the Vaishnavas started hesitating out of fear, they did not have the courage to speak.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)