श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.16.36 
কৃষ্ণ-দাস্য বহি আর নাহি অন্য গতি
বুঝাহ, মোহার পাছে হয আর মতি”
कृष्ण-दास्य वहि आर नाहि अन्य गति
बुझाह, मोहार पाछे हय आर मति”
 
 
अनुवाद
"कृष्ण की सेवा के अतिरिक्त मेरा कोई अन्य लक्ष्य नहीं है। मुझे यह समझने में सहायता करें ताकि मेरा मन विचलित न हो।"
 
"I have no other goal than serving Krishna. Help me understand this so that my mind is not distracted."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)